7.रात की सदा । Sad Shayari ।gazal love poetry ।shayar mubarak khna ।

   धड़कनें भी ज़ोर से तब डगमगा आ जाती थीं,

नींद आँखों से अचानक दूर जा आ जाती थी।


रात के ग्यारह बजे जब जागता था सारा शहर,

बात करते-करते तेरी ही सदा आ जाती थी


चुपके-चुपके बात करना रात के इस मोड़ पर,

याद बचपन की कोई जैसे ज़रा आ जाती थी।


बस तेरा ही नाम पाकर मुस्कुरा ही देता था

सामने तस्वीर तेरी मुस्कुरा आ जाती थी।


ख़्वाब हों या डर हों दिल के, सब बयां होने लगे,

बीच में ही हिचकियाँ भी जान-ए-जाँ आ जाती थीं।


 -- शायर मुबारक खान --











टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ज़िंदगी के झमेले – हिंदी शायरी पुस्तक PDF | Read Online & Download | shayar Mubarak Khan